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12 May 2017

आँखों की देखभाल कैसे करें How to care of eyes

aankho ki dekh bhal kyse kre
दोस्तों वैसे तो शरीर का हर एक अंग इम्पोर्टेन्ट है, ये कहना की सिर्फ आँखे ही शरीर का मुख्य हिस्सा है, यह बात भी गलत नहीं है, ईश्वर ने शरीर में आँखों के रूप में वो अनमोल तोहफ़ा दे दिया है जिसे शब्दों में बयाँ नहीं किया जा सकता,

क्योंकि दुनिया में आने के बाद हमें 'जन्म देने वाले' हमारे पेरेंट्स को जब किसी ने पहचाना आपकी माँ हैं, वो आपके पिता है तो किसी और ने नहीं हमारी आँखों ने पहचाना, आँखें हैं तो जीवन में उजाला है वरना ज़िन्दगी दूसरों के सहारे की मोहताज होती हैं तो आइये हम अपना भी फ़र्ज़ निभाते हैं, आँखों को बीमार होने से बचाते हैं।

आँखों की देखभाल कैसे करें जानिए कुछ ख़ास टिप्स !

आँखों को साफ़ ठंडा व निरोगी रखने के लिए :- जब अर्ली मॉर्निंग आप बिस्तर से उठें और फ्रेश होकर, भोजन के बाद, दिन मे कई बार और रात में सोते समय, मुँह में पानी भरकर आँखों पर साफ़ ठंडे पानी के छीटें मारें, इससे आँखों की रोशनी बढ़ती है

ध्यान रहे कि मुँह का पानी गर्म न होने पाए, पानी गर्म होने पर बदल लें, मुँह से पानी निकालते समय पूरे ज़ोर से मुँह को फुलाते हुए वेग से पानी छोड़ें, इससे ज़्यादा लाभ  होता है आंखों के आस-पास झुर्रियां नहीं पड़ती। इसके अलावा अगर पढ़ते समय अथवा आँखों का कोई अन्य  बारीक काम करते समय आँखों में ज़रा भी थकन महसूस हो तो तस विधि से ठंडे पानी से आंखों को धोएं, आँखों के लिए यह बहुत ही फायदे मंद है

पानी में आखें कैसे खोलें :- नहाते समय बाल्टी में पानी भर लें, कोशिश करें पानी ताज़ा हो, उसमें आँखों को डुबोकर बार बार खोलें  और बंद करें दोस्तों सबसे अच्छा माना जाये तो स्वीमिंग पूल, या किसी शांत नदी में (जिसका पानी साफ़ सुथरा हो) डुबकी लगाकर ये उपाय फॉलो किया जाये तो बहुत ही फायदेमंद है, आँखों के साथ सा:-थ पूरी बॉडी भी स्वस्थ रहेगी।

आराम ज़रूर करें :- दोस्तों हम काम/ऑफिस या बाइक ड्राइव करना, या रोज़ डेली रूटीन जो भी काम करते हैं दिन बार आँखों का यूज़ करते हैं कितना पोल्यूशन आँखे झेलती हैं लेकिन उनकी ओर कभी ध्यान नहीं देते, आँखों को आराम देने के लिए थोड़े-थोड़े टाइम के गैप के बाद आँखों को बंद करके, दिमाग़ को रिलैक्स करके, अपनी दोनों हथेलियों से इस तरह ढक लीजिए ताकि बहार की रौशनी ज़रा सा भी दिखाई न दे।

हथेलियों का दबाव आँखों पर हल्का सा पड़े, साथ ही साथ अँधेरे का ऐसा ध्यान करिये लगे की आप अँधेरे कमरे में बैठे हुए हैं इससे आँखों को रिलैक्स मिलता है, और मन भी शांत होता है चाहे कोई रोगी हो या न हो चाहे कोई उम्र दराज़ हो या यंगगेस्टर, सभी को यह फॉलो करना चाहिए।

आँखों की मूवमेंट बरक़रार रखे :- रफ़्तार ही जीवन है इस थियोरी के अनुसार बॉडी के हर पार्ट को हेल्दी और एक्टिव बनाये रखने के लिए, उसमें हरकतें होते रहना बहुत ही ज़रूरी और फायदेमंद है पलकें झपकना आँखों की नार्मल ऐक्टिविटी है, बच्चों की आँखों में आसान रूप से यह रेगुलर ऐक्टिविटी होती रहती है।

नार्मल तौर से पलकें झपका कर देखने से आंखे साफ़ सफाई होती रहती है, किसी को घूरना आँखे फाड़ कर देखना बुरी आदत तो है ही इस तरह हरकत करना मतलब आँखों का गलत इस्तेमाट करना है इससे आँखों में थकान व सुस्ती आ जाती है।

avoid smart phone for the for the protection eyesस्मार्टफोन से चिपके रहना :- दोस्तों स्मार्टफ़ोन हमारी लाइफ का हिस्सा बन चुका है, आज कल के कुछ स्टूडेंट्स महाशय ऐसे भी हैं जिन्हें फ़ोन से ऐसा लगाव हो गया है कि किताबों में भले ही दिल न लगता हो, पर फ़ोन पर नोटिफ़िकेशन देखने की दिल्लगी सी हो चुकी है, ऐसे में आँखों को बहुत ही तकलीफ़ सहना पड़ता है बेचारी आँखे दर्द बयाँ तो करती है पर उन्हें इग्नोर कर देते हैं

इसका साइड-इफेक्ट यह होता है की काम दिखाई देने लगता है आँखों से आंसू बिना रोये ही निकलते रहते हैं और डॉक्टर साहब के पास जा कर दवा लेते हैं अच्छा ख़ासा फीस भी भरते हैं यह तक नकली आँखे अर्थात चश्मा लगाने की नौबत आ जाती है इस लिए हमे बार-बार पलके झपकने की आदत अपनानी चाहिए, आँखों को स्वस्थ्य रखने के लिए नार्मल तौर से पलकें झपकते रहना नैचुरल उपाय है
    सही ढंग से पढ़े और देखें :- स्टूडेंट्स को खास कर इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि वे आँखों को चौंधियाँ देने वाले अत्यधिक तेज़ रोशनी में न देखें साथ में इस बात का भी ध्यान रखें कि कम रोशनी में व लेटे-लेटे पढ़ना भी आँखों के लिए बहुत हानिकारक है आज कल के स्टूडेंट आमतौर पर इसी आईडिया को अपनाते हैं, बहुत कम रोशनी या बहुत ज़्यादा रोशनी में पढ़ने लिखने या ऐसे अन्य काम जिनमें आँखों का ज़्यादा यूज़ करने से आँखों पर ज़्यादा ज़ोर पड़ता है, आँखे कमज़ोर पड़ जाती हैं और कम उम्र में चश्मिश हो जाते हैं, सामान्य तौर से कहा जाये तो पढ़ने के दौरान आँखों  किताबों के बीच 12 इंच अथवा थोड़ी अधिक दूरी रखनी चाहिए।

    खाने पर विशेष ध्यान :- आपकी आँखों का हेल्थ आपके डाइट पर भी डिपेंड करता है, पेट में कब्ज़, आँखों की बिमारी के साथ-साथ कई तरह की बीमारियों का जड़ है, इसलिए पेट को हमेशा साफ़ रखें और कब्ज़ न होने दें इससे भी आँखों की रक्षा कर सकते हैं इसलिए दोस्तों हमेशा डाईजेस्टबल और सादा भोजन ही खाएं। 

    योग से रोगमुक्ति :- योगासन भी आँखों की बीमारियों को दूर रखने में बहुत ही हेल्पफुल साबित होते हैं सर्वांगासन आई डिसॉर्डर को दूर करने का और आँखों की रोशनी बढ़ाने का बहुत बढ़िया आईडिया है।

    आँखों की नार्मल कसरतें :-
    1. हर रोज़ सुबह-शाम एक-एक मिनट तक पलकों को तेज़ी से खोलने बंद करने कोशिश जरूर करें।
    2. आँखों  बंद करें और दस सेकंड बाद तुरंत खोल दें । 
    3. आँखे को खोलने-बंद करने की कसरत ज़ोर देकर रेगुलर करो मतलब जब एक आँख खुली हो तो उस समय दूसरी बंद रखें, आधा मिनट ऐसा करना आँखों की मसल्स रिलैक्स हो जाती हैं।
    4. पलकें बंद करके हल्के हाथ से दबाये रखे मन शांत करे ध्यान लगाएं 4-5 मिनट तक फिर अँगुलियों को हटा ले ऐसा करने से आँखों की नसों का तनाव दूर हो जाता है 


    आँखों की सुरक्षा के उपाय :-
    1. गर्मी और धूप में से आने के बाद शरीर पर एकदम से ठंडा पानी ना डालें, पहले पसीना सुखा कर शरीर को ठंडा कर लें, सर पर न ज़्यादा गर्म पानी डालें न ज़्यादा गर्म पानी से फेस धुलें। 
    2. अगर नींद का समय हो गया हो, आपको नींद आ रही हो और आँखें भरी-भरी सी लगने लगें तो फ़ौरन फ़ोन व किताबें बंद कर के सो जाएँ, तब जागना बिलकुल ही सही नहीं। 
    3. सुबह सूरज निकलने के बाद सोये रहना, दिन में सोये रहना और रात में देर तक जगने से आँखे बेनूर हो जाती है आँखों पर तनाव पड़ने लगता है।
    4. बहुत दूर की और बहुत चमकीले चीज़ों को घूर कर न देखो, धूल, धुआँ और तेज़ रोशनी को आँखों से बचाना चाहिए।
    5. बिना चश्मा बाइक, स्कूटी फर्राटे से न चलाये आँखों की सुरक्षा से साथ-साथ शरीर की सेफ्टी का ख्याल रखें।
    यह भी पढ़ें :- लम्बी उम्र जीने के लिए फिट और फाइन कैसे रहें

    अगर आप आँखों को हेल्दी रखने की इस छोटी छोटी टिप्स पर ध्यान दें और रेगुलर तौर पर केयरफुली इन बातों को फॉलो करते रहे, तो आप लम्बे वक़्त तक अपनी आँखों को तमाम तरह के रोग व इन्फेक्शन से बचा कर सुन्दर और अट्रैक्टिव बनये रख सकते हैं

    आँखे बिना कुछ कहे बहुत कुछ बयाँ कर जाती है इनको सेफ रखें आपकी अमानत है 
    ख़ुश रहें सेफ रहें दूसरों की मदत करें 

    30 Apr 2017

    लम्बी उम्र जीने के लिए फिट और फाइन कैसे रहें

    कुछ ऐसे भी महान व्यक्ति इस दुनियाँ आये और गए जिनके बारे में अपने सुना होगा पढ़ा होगा, कि उनका जीवन काल काफी दिन तक रहा वो बाकियों की मुकाबले ज़्यादा दिन जिए यहां तक सौ साल से ज़्यादा भी, उनकी लाइफ बहुत ही फिट थी, और दुनिया में एक अलग पहचान थी, कुछ लोग मिसाल बन कर आज भी जी रहे हैं, वो काफी शांत रहते हैं, किसी से बातें करते हैं, तो ऐसा लगता है, उनमें कुछ तो बात है जिससे लोग इम्प्रेस हो जाते हैं, पर कैसे? क्या वे गॉड गिफ़्टेड हैं या कुछ और! दोस्तों ऐसी कोई बात नहीं वे भी हम जैसे नार्मल व्यक्ति हैं बस उन्होंने अपनी Life Systematic ढंग से जिया.!

    Healthy-good-lifestyle-being-youngदोस्तों आइये जानते हैं कुछ टिप्स जिन्हें जीवन में फॉलो कर सुखी रह सकतें है .! 

    हर व्यक्ति लम्बी उम्र, Healthy lifestyle और Happy रहना चाहता है अगर Healthy और Long life जीना है तो कुछ महत्वपूर्ण नियमों को जानिए और अपनी Life में फॉलो ज़रूर करें!

    सुबह जल्दी उठना योग Exercise करना, मन शांत रखना:- Good Behaviour भाई चारा, ईमानदारी ये सारे अच्छे स्वभाव मनुष्य को Long life जीने में बहुत ही मदद गार साबित होते हैं क्योकि योग मनुष्य को आत्म ज्ञान से परिचय कराती है, मन को शांत एवं करुणा मयी बनती है, आज के ज़माने में हम मिलजुल कर साथ तभी रह सकते हैं जब हम शांत स्वभाव के हों, दया की भावना हो, हमारे अंदर लालच न हो।

    लम्बी उम्र और Healthy जीने के लिए Early Morning उठ कर कम से कम 5 मिनट तक 15 मिनट टहलें, क्योंकि सुबह की ताज़ी हवा में Oxygen की मात्रा बहुत ज़्यादा होती हैं जो सेहत के लिए फायदे मंद तो है ही, साथ ही शाम को खुली हवा में टहलना Health को फिट और फाइन बना देती है इससे माइंड का Stress भी काम हो जाता है तो दोस्तों Early Morning उठिये स्वस्थ और मस्त रहिए।

    कुछ लोग ऐसे भी है जिनकी आंखो ने Good वाली Morning का ठीक से दीदार भी नहीं किया, पर उन्हें फ़ौरन चाय कॉफ़ी चाहिए, तो दोस्तो चाय कॉफ़ी, शराब-क़वाब, Smoking,  पान मसाले की लत को लात मार दें, यह शरीर को छीण व Blood को दूषित करके कैंसर को जन्म देता है, इसलिए इनका Avoid करें।

    लाइफ आपकी है इसे खुद सँवारे..!   

    Follow-right-way-bathing-bathroomनहाने का सही तरीका अपनाएं:- नहाते समय एक बार में पूरी Body को न भिगोएँ पहले सर भिगोएँ फिर पावं, पहले पावं न भिगोएँ इससे शरीर की गर्मी उपर की ओर चढ़ने लगती है जो सेहत के लिए हानिकारक है एक बाल्टी पानी भर लें फिर उसमें फेस डुबोएँ और आँखे झपकाएँ, इससे आँखों की मसल्स स्ट्रांग होती है और कचरे साफ़ हो जाते हैं।

    सुबह जल्दी नहाने से स्किन साफ़ सुथरी हो जाती है और फेस चमकदार रहता है फुर्ती महसूस होती है दिन भर एक Positive Energy सा फील होता है और कई सारी सीजनल बीमारी से Protection मिलती है इस लिए रोज़ खुद नहायें और दूसरों को भी सलाह दें।

    मोटे एवं कॉटन कपडे ही पहनें ! Synthetic कपड़े Health के लिए हितकर नहीं है रैशेज़ व स्किन Infection होने के ज़्यादा चांस होते हैं जिससे काफी तकलीफ़ का सामना करना पड़ सकता है। 

    ठीक से ना खाना बिमारियों को इन्वाइट करना है..!

    Pay-attention-yummy-eating-foodखाने पर ठीक से ध्यान दें:- Normally 20 से 25 मिनट तक अच्छे से खूब चबा-चबा कर खाएं, इससे Digestion सही रहता है अच्छी तरह चबाये बिना खाना खाने वाले लोग अक्सर चिड़चिड़े व ग़ुस्से Nature के हो जाते हैं, उन्हें हर चीज़ में जल्दी मची रहती है, इसका मतलब यह भी नहीं कि बहुत धीमे गति से खाये, सामान्य ढंग से दिल लगा कर खाएं।

    आलस और बेचैनी न पालें Systematic ढंग रहें, पेट कभी भी खली न रखें, शरीर में उत्साह हो एवं हल्कापन महसूस हो, इसलिए दोस्तों Lunch, Dinner तभी करें जब इच्छा हो, बिना भूख के खाना-खाना बिमारियों को Invitation देना है, कुछ भुक्कड़ टाइप के लोग ये बात समझ नहीं पाते और बाद में परेशान रहते हैं

    नाईट में खाना पचने में काफी वक़्त लगता है इसलिए रात मे समय का ख्याल रखते हुए टाइम से खाना खा लेना उचित माना जाता है, जिससे खाने को पचने में पर्याप्त समय मिल जाता है 

    सही तरीके से पानी पीने के बेनिफिट्स..!

    Water-Drinking-Benefits-Right-Wayडेली रूटीन में पानी सही मात्रा में पिएं:- हमारे शरीर में 2/3 हिस्सा पानी है एक Adult व्यक्ति के शरीर में Aprox 60% पानी होता है मानव शरीर में ज़्यादातर पानी हमारे Cells में मौजूद है। Medically और Google-ator के मुताबिक 70/72 Kg एक नार्मल व्यक्ति वाले शरीर में 40 लीटर तरल पदार्थ होता है, लगभग 25 लीटर कोशिकाओं/Cells (इंट्रासेल्युलर) के भीतर है। शेष 15 लीटर पूरे शरीर के Blood की मात्रा में या अन्य एक्स्ट्राससेलुलर तरल पदार्थ में फैले हुए हैं।

    एक दिन में कम से कम एक व्यक्ति को 12 से 15 गिलास पानी पीना चाइये, इससे शरीर में काफी मात्रा में तरल रहता है व्यक्ति Dehydration का शिकार नहीं होता, खास कर गर्मियों के मौसम में इसका विशेष ख्याल रखे, फेस ख़ुश्क नहीं पड़ेगा प्यास का अहसास नहीं होगा, काम में मन लगेगा, शरीर में फुर्ती बनी रहेगी।

    Toilet करने के तुरन्त बाद पानी न पिए, पानी पीते ही तुरन्त बाद Toilet नहीं जाना चाहिए, अगर Toilet करने की इच्छा हुई हो तो उस टाईम पानी पीना, भोजन करना, Mating, करना आदि हितकारी नही है, क्योकि इससे तमाम टाईप के मूत्र रोग हो सकते है मूत्र का रफ़्तार (Speed) नही रोकना चाहिए, ऐसा करने से बीमार भी पड़ सकते हैं, अतः कुदरती तरीक़े से जितनी जल्दी हो सके पूरी कर लेनी चाहिए।

    ख़ुशी जैसी ख़ुराक़ नही और चिंता जैसा ग़म नहीं..!

    हंसने से बीमारियाँ दूर भागती हैं:- हंसना सारी बीमारियों पे मरहम लगाने जैसा है, हसनें से Lungs का बढियां Exercise हो जाता है Breathing Capacity बड़ जाती है  Blood Circulation तेज़ होने लगता है, जिससे Body मे लाभकारी परिवर्तन होने लगते हैं।

    बड़ी कॉमन सी बात है दोस्तों चिंन्ता चिता तक पहुंचा देती है यह बात सब जानते हैं अर्थात:- हसते रहें, ख़ुश रहे, निरोगी रहें, असली न सही नकली ही हस दिया करिए स्वस्थय रहने के लिए, दिल का रोग, दिल का दौरा पड़ना, मानसिक तनाव, डिप्रेशन, एसिडिटी, ब्लड प्रेशर, सर्दी जुकाम, कैंसर आदि रोगों में हसनें से बहुत लाभ होता है।

    हेल्थ अगर ठीक रहे व्यक्ति सुखी व शांत रहता है क्योंकि हेल्दी शरीर में हेल्दी शॉर्प माइंड हो सकता है अच्छी और सुकून भरी नींद भी आती है यह सारी बातें जो लोग फॉलो करेंगे उन्हें ज़िन्दगी जीने में बहुत ही आनंद प्राप्त होगा क्योंकी...
    "ये दौलत ये शोहरत कुछ न काम आएगी , बस यहीं धरी की धरी ही रह जाएगी"
    खुश रहें मस्त रहें, दूसरों की मदत करें  

    20 Apr 2017

    स्कूल टाइम और बचपन की प्यारी यादें

    School-days-sweet-memories-childhood-essay-in-hindiकिसी ने सच ही कहा है स्कूल ईश्वर के घर जैसा होता :- है क्योकि जैसे ईश्वर का घर सबके के लिए होता है वैसे ही स्कूल भी वहाँ कोई बड़ा छोटा नहीं, अमीर फैमिली से हो या गरीब सब बच्चे एक जैसे स्टूडेंट की तरह ही दिखते एक जैसा ड्रेस पहनते, एक साथ पढ़ते खेलत, इंटरवल में सब खाना खाते, खेतले मस्ती करते एक ही Campus के अंदर एक समान माहौल बहुत ही हैप्पी Moment होता है जो हर किसी की लाइफ में ये पल आता है।

    यह लाइफ का गोल्डन पार्ट होता है :- जनमे स्कूल टाइम वाली अच्छी लाइफ और प्यारी यादें तो होती हैं साथ ही खूब सारी मस्ती, पढाई, खुराफ़ात सबका पिटारा भरा होता है दोस्तों स्कूल टाइम में अक्सर हम यही सोचते थे स्कूल ना जाना पड़े आज छुट्टी होती तो कितना मज़ा आता बुख़ार होने का बहाना पेट में  दर्द, पैर में चोट लगने का बहाना तमाम तरह के बहनों की खोज करते रहते थे, "लेकिन वही सब बाते आज याद करने में बहुत अच्छा लगता है।

    स्कूल टाइम की कुछ बातें अब समझ आती हैं,

    पापा मम्मी सुबह सुबह जब उठाते थे :- हमारा उठने का बिलकुल मन नहीं करता था सोचते थे और सोने को मिले, बिना जगाये उठते ही नहीं थे पर अब ऑफिस/काम पे जाना है बिना कहे ही तैयार होकर निकल जाते हैं "टीचर्स और पैरेंट्स" हमारी लाइफ के ऐसे मार्ग दर्शक होते हैं जिनकी प्रेरणा से हम ना जाने कितनी बातें सीख लेते हैं जिससे शब्दों में बयाँ नही किया जा सकता।

    दोस्तों पैरेंट्स का प्यार डांट फटकार और गुस्सा :- यह हमारी लाइफ को वो बातें महसूस करा देती हैं जिससे हमारी बढ़ती उम्र में बहुत मदद ग़ार साबित होती हैं । क्योँकि दोस्तों क्या होता है हमारे बचपन में इन सब चीज़ो से जब सामना हो जाता है, तो आगे की लाइफ में कोई बात नयी नहीं लगती ! बस फील होता है ! "यार ये तो" स्कूल/कॉलेज वाली लाइफ में मेरे साथ हो चुका है उस बात पे डांट, फटकार पड़ी थी।

    लाइफ बड़ी ही Complicated होती जा रही है:- अचानक से कोई कुछ कह दे तो मन बहुत दुखी तो होता ही है, लाइफ में अच्छे बुरे Situation दोनों को डील अच्छे से करना चाइये, हमे जैसा माहौल हो वैसे खुद को ढाल लेना चाइये (ख़ास कर अच्छी आदतों में) यह तमाम बातें पैरेंट्स और स्कूल दोस्त यार के बीच ही में हम सीखते हैं एक बात तो है हर चीज़ो का एक वक़्त होता है जब तक समझ में आती हैं तो वो लम्हें गुज़र चुके होते हैं ।

    आप सभी दोस्तों को DEDICATE कर रहा हूँ,

    article on school life is the best lifeअब आप यह पढ़ और फील करें वो स्कूल/कॉलेज की यादें :- जहां हम पढ़े वहां की धूप बहुत अच्छी लगती थी और अब हम AC में भले ही भी बैठ रहे हों पर वो बात नहीं रही, वहां घाँस पर मज़े से बैठना अच्छा लगता था अब ऑफिस की कुर्सी पर बैठने पर वो सुकून कहा मिलता है।

    कैम्पस के बहार समोसे वाली दुकान :- जब हम भीड़ में घुस कर समोसे ख़रीद कर खाते थे उसमें जो स्वाद आता था अब बड़े बड़े रेस्टोरेंट के पिज़्ज़ा बर्गर में वो वाली बात कहाँ स्कूल के नल के पानी में जो मिठास थी वो अब ऑफिस के RO के पानी में वो टेस्ट नहीं मिलता।

    क्लास में कागज़ का जहाज़ उड़ाया करते थे :- हम में से ज़्यादा तर बच्चे शायद ऐसा कारनामा किये किये होंगे और पकड़े जाने पर दूसरे का नाम लगाते थे उन दिनों स्कूल के ड्रेस में जो कॉन्फिडेंस था वो आज कितना भी महगा फॉर्मल पहन लो कोई मलतब नहीं, वो ब्लैक सूज़ में जो बात थी अब कितने भी ब्राँडेड जूते पहन लो पर वो मज़े नहीं।

    बस के पीछे वाली सीट :- मज़ा तो तब आता था जब स्कूल/कॉलेज बस के पीछे वाली सीट पर गाना-गाना ज़ोर से हंस कर शोर मचाने वाली आवाज़ ना जाने कैसे चुप हो गयी अब काम,ऑफिस घर तक लाइफ सिमटती चली जा रही है सच में वो ज़िन्दगी- ज़िन्दगी थी कोई फ़िक्र नही था।

    आज हमारी लाइफ कहाँ भागी जा रही है!

    दोस्तों आप ये पोस्ट पढ़ रहे होंगे खुद सोचिये :- आप वो रहे ही नही जो पहले थे, खुद सोचो ! जब बर्थ-डे होता था तो सारे दोस्त इकट्ठे हो कर मस्ती के साथ सेलिब्रेट करते थे अब दोस्तों से मिले बिना फेसबुक व्हाट्सअप पे ही विश हो जाती है स्कूल हाल मेंशोर मचाते ही आवाज़ गूंज उठती थी पर अब ना जाने इतने शांत रहना कैसे सीख गए।

    एग्जाम टाइम में आगे वाली सीट :- ओए "बता दे न यार" आपने भी ऐसा किया होगा लेकिन हमसे ज़्यादा नंबर उसे न मिल जाए इसके चक्कर में हम दूसरे को नहीं बताते थे बहुत सारी यादे और बातें हैं जितना भी कहो सब कम लगता है उन दिनों जिनसे से हम क्लॉस रूम में सीट के लिए लड़ते झगड़ते थे जिसे देखकर पसंद भी नहीं करते थे आज हम उन्हें इंटरनेट पर अक्सर खोजा करते हैं, "हम बड़े कब हो गए स्कूल के दिन न जाने कहाँ खो गए" ये सारी बातें अब एक सपने जैसी लगती हैं।

    लाइफ में नो टेंशन वाले लम्हे,

    लाइफ में नो टेशन वाला वक़्त बचपन व स्कूल का होता है घर में क्या हो रहा है खाना कैसे बनेगा, पैसे कौन कमा रहा है, कोई फर्क नहीं हमे तो बस पढाई, खेल कूद, दोस्त यार मस्ती और किसी से कोई मतलब नहीं दुंनिया में क्या हो रहा क्या नहीं ज़रा भी खबर नहीं अच्छा खाने, पहनने को मिले और क्या चाहिए।

    संगीतकार :- जगजीत सिंह साहब ने एक ग़ज़ल के माध्यम से बचपना को बहुत ही खूबसूरती से साथ ग़ज़ल में तराशा है चंद लाइने मैं आप से शेयर कर रहा हूँ।

    "ये दौलत भी ले लो, ये शोहरत भी ले लो , भले छीन लो मुझसे मेरी जवानी
    मगर मुझको लौटा दो बचपन का सावन , वो कागज़ की कश्ती, वो बारिश का पानी"

    बचपन का मोल कोई भी नही लगा सकता बस Enjoy किया जा सकता है महसूस किया जा सकता है क्योकि हम बचपन में कितनी भी गलतियां, शरारत करते हों सारी माफ़ होती थीं "इसलिए कहा गया है"

    "जो जाके ना आए वह जवानी देखी , जो आके ना जाए वो बुढ़ापा देखा"

    कुछ बच्चे जो बहुत गरीब परिवार से होते हैं, 

    story about street kidsकुछ ऐसे परिवार के बच्चे भी अपने देश में हैं जो पढ़ना तो दूर ठीक से खाने तक को भी ठीक से नसीब नहीं होता ऐसे बच्चे गली, चौराहे और फुटपाथ पे हमे अक्सर दिख जाते हैं।

    एक बार मैंने कुछ बच्चों से बाते की :- कुछ ऐसी इमोशनल बाते निकल कर सामने आई! जिसे आपके साथ शेयर कर रहा हूँ हमे लगता है कि वो नहीं सोचते पढ़ाई लिखाई क्या होती है किताबे क्या होती हैं, स्कूल क्या होता है सब से अनजान अपनी धुन रहते हैं "उन्हें देख कर बस यही लगता है" पर दोस्तों ऐसा बिल्कुल भी नही है।

    नार्मल बच्चों जैसी हमारी भी लाइफ हो, वो सोचते हैं 

    ऐसे बच्चे स्कूल तो जाना चाहते हैं:- पढ़ना तो वो चाहते हैं पर न तो उनका एडमीशन करने वाला होता है न यूनिफार्म न किताबें होती हैं पर इन सब ज़रूरतों को पूरा करेगा कौन ? न उनके पास घर है न माँ बाप कौन देखभाल करेगा, फुटपाथ के बच्चे जब स्कूल के बच्चों को देखते हैं उनकी लाइफ को महसूस करना चाहते हैं उनका घर, परिवार कैसा होगा कमरा कैसा होगा अच्छे अच्छे कपडे पहनते देख उनका भी मन करता है ये सारी बातें एक फुटपाथ पर सोने वाला बच्चा भी सोचता है

    ऐसे बच्चों को दुःख तो तब होते हैं जब किसी होटल/रेस्टोरेंट में उनकी उम्र के बच्चे माँ बाप के साथ खाने, पीने मस्ती करने आते हैं और वो बच्चे उनके जूठे बर्तन धुलते हैं।

    ऐसा नहीं की हम सब को उनको परवाह नहीं :- दोस्तों हम सोचते हैं उनको देख कर दुःख भी होता है पर हम अपनी ही लाइफ में ही उलझे हुए रहते हैं, इस वजह से उनकी चाह कर भी मदत नहीं कर पाते, मेरी ईश्वर से यही प्रार्थना है ऐसे बच्चों के लिए फ्यूचर में कुछ न कुछ हल ज़रूर निकले जिससे वह बच्चे भी शिक्षा पा सके जिनके आगे पीछे कोई नहीं।

    7 Apr 2017

    विश्व स्वास्थ दिवस : जानिए कुछ ख़ास बाते

    vishwa swath sangathanअच्छा हेल्थ फिट और फाइन रहना किसे नही पसंद, सभी स्वस्थ रहें खुशहाल हो, हर परिवार की यही इच्छा होती है आज विश्व स्वास्थ दिवस है जो 1948 में WHO (World Health Organization) के द्वारा 7 अप्रैल को मनाने का फैसला किया गया, यह बहुत खास दिन है लोगों को स्वास्थ के प्रति जागरूक करना ताकि आने वाले फ्यूचर को रोग मुक्त बनाया जा सके । वैसे तो WHO से जुड़े कई हेल्थ प्रोग्राम हैं पर आज हम विश्व स्वास्थ दिवस के मौके पर Maternal and Reproductive Health (मातृ और प्रजनन स्वास्थ्य) जो की विश्व स्वास्थ दिवस का एक अहम हिस्सा है जिसके विषय में चर्चा करेंगे । आइए जानते हैं प्रेग्नेंसी से जुडी कुछ महत्वपूर्ण बातें !

    हेल्थ के प्रति काफी जागरूकता भी आयी है लेकिन अभी भी कुछ मामले  सामने आते हैं जिन्हें सुन कर देखकर हम काफी चिंतित हो जाते हैं टॉपिक है प्रसव पूर्व प्रेग्नेंसी में कैसे ध्यान दें और किन-किन बातों पर ज़्यादा फोकस करना चाहिए जिस से माँ और बच्चा दोनों स्वस्थ हों

    सबसे पहले तो मैं आपको बतादूँ कि हमारे देश में महिलाओं की प्रेग्नेंसी से जुडी काफी प्रॉब्लम्स बनी रहती है Mostly हमारे गावों में आज भी अज्ञानता, ग़रीबी, अशिक्षा व कुछ डर के कारण Delivery ठीक से होने में काफी Complication आ जाती है यहाँ तक की मौत भी हो जाती है यह पोस्ट लिखने का मकसद यह है की आज का ज़माना इन्टरनेट स्मार्ट फ़ोन का ज़माना है शहर में लोग इस्तेमाल करते ही करते हैं बल्कि गाँव में भी ख़ूब इस्तेमाल किया जा रहा है इसलिए इस पोस्ट के माध्यम प्रसव पूर्व जांच व गर्भावस्था में चिकित्सा जांच के फायदे के बारे में उन सभी तक पहुँचाना जागरूक करना मेरी एक छोटी सी कोशिश है ताकि जच्चा व बच्चा दोनों स्वस्थ्य हो और परिवार खुशहाल रहे।

    प्रेग्नेंसी पता चलते ही चार मुख्य जाँच !

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    गर्भवती महिला के प्रसव से पहले चार मुख्य जाँच करना Compulsory है जिसे ANC (Ante Natal Checkup) कहते हैं ANC क्या है इसकी सम्पूर्ण जानकारी आपके नज़दीकी हेल्थ सेंटर से मिल जाएगी फिर भी कुछ जानकारियाँ आपके साथ शेयर की गयीं हैं।

    • पहली ए.एन.सी जाँच माहवारी छूटते ही या महावारी छूटने के पहले तीन माह महीने के भीतर 
    • दूसरी ए.एन.सी जाँच प्रेग्नेंसी के चौथे से छठे महीने में 
    • तीसरी ए.एन.सी जाँच प्रेग्नेंसी के सातवें से आठवें महीने में 
    • चौथी ए.एन.सी जाँच प्रेग्नेंसी के नवें महीने में
    ANC के अलावा भी कुछ अन्य जाँचें जिन्हें करना भी आवश्यक है !
    • हर प्रसव में ख़ून व पेशाब की जाँच
    • B.P (ब्लड प्रेशर) वज़न और पेस्ट की जाँच कराएं, साथ ही आपको I.F.A (आयरन फोलिक एसिड ) की गोलियां व एक महीने के अंतर पर T.T (टिटेनस टॉक्साइड) के दो टीके लगवायें
    • पेशाब में एल्मुनियम और शुगर तो नही है इसकी जाँच कराये, क्योँकि एल्मुनियम और शुगर का जाँच कराना माँ व बच्चे को गंभीर कंडीशन में जाने से बचता है 
    • अपना वज़न नपवाएँ क्योँकि गर्भावस्था के दौरान औसतन 9 -11 किलो वज़न बढ़ता है, 
    • बच्चे का विकास ठीक तरीके से हो रहा है इसका पता लगाए के लिए पेट की जाँच करना बेहद ज़रूरी है 
    • खून की कमी का पता लगाने के लिए H.B (हीमोग्लोबिन) की जाँच कराये, हीमोग्लोबिन की जाँच से शरीर में खून की मात्रा पता लगने से उपचार में मदत मिलती है 
    • हाई बी.पी का पता लगाने के लिए अपने ब्लड प्रेशर की जाँच करवाये क्योंकि हाई बी.पी होने से गर्भवती महिला और बच्चे दोनों को ख़तरा रहता है 
    आयरन फोलिक एसिड (I.F.A) गोलियाँ ज़रूर लें 

    गर्भावस्था के दौरान I.F.A की गोलिया लेने से माँ में ख़ून की कमी नही होती है और होने वाला बेबी हेल्दी होगा ये कन्फर्म होता जाता है अगर माँ को कोई अन्य समस्या न हुई तो,
    Generally तौर पर I.F.A की एक गोई रोज़ लेनी चाहिए परंतु अगर महिला को एनीमिया है तो डॉक्टर के मुताबिक I.F.A की दो गोलियां सुबह और शाम लेने की सलाह दी जाएगी,

    यह भी पढ़ें :- एनीमिया क्या है इसका लक्षण कैसे पता करें 

    प्रेग्नेंसी के दौरान डाइट (आहार)

    • प्रेग्नेंसी के दौरान आपको दिन में एक एक्स्ट्रा डाइट लेना बेहद ज़रूरी है 
    • दूध, दही और छांछ, पनीर इनमे ज़्यादा मात्रा में कैल्शियम,प्रोटीन और विटामिन होते हैं
    • फ्रेश मौसमी फ्रूट और सब्ज़ियां खाये क्योंकि इनमे विटामिन व मिनलर मिलते हैं छिलके वाली दालें और अनाज इनका अच्छा सोर्स हैं
    • हरी पत्ती दार साग सब्ज़ियां आयरन व फोलिक एसिड से भरपूर होता है 
    • मुट्ठी भर अप्रोक्स (45gm) मूंगफली के दाने और कम से कम दो कप दाल से शाकाहारी लोगों की दैनिक रूटीन पूरी हो जाती है
    • मांसाहारी लोगों के लिए मीट, अंडा, मछली प्रोटीन विटामिन और आयरन के अच्छे सोर्स मिलते हैं 
    • "मल्टी प्रोटीन युक्त खाना खाने से गर्भवती महिला को उसके बच्चे के विकास में बढ़त मिलती है व ख़ून की कमी नही होने देता"
    • साफ़ सफाई पर ज़्यादा ध्यान दें 
    • हर बार खाना खाने से पहले व शौच के बाद हाथ खूब अच्छी तरह से हाथ को साबुन या हैण्ड वास से धोएं,
    • लगातार हाथ की सफाई के साथ-साथ नाख़ून को भी समय से काटती रहें,  
    • खाने को अच्छी तरह से ढक कर रखें और साफ़ व शुद्ध पानी पीएं,

    प्रेग्नेंसी के दौरान कितना आरम करें 

    • रात में 8 घंटे और दिन में काम से काम 2 घंटे आराम करें
    • बाएं करवट लेटें क्योकि गर्भ में पल रहे बच्चे को खून की Supply बढ़ जाती है 
    • भरी सामान उठाने व कड़ी मेहनत करने से बचें 
    • काम को अपने ऊपर ज़्यादा ज़ोर न दें और कुछ कामों में दूसरों की Help लें 

    पारिवारिक सपोर्ट की सबसे ज़्यादा ज़रूरत 

    • परिवार का बिहेवियर व माहोल हँसी ख़ुशी से भरा होना चाहिए 
    • परिवार की यह ज़िम्मेदारी होती है की वह गर्भवती महिला के खाने पीने की चीज़ों पर ठीक से ध्यान दें 
    • लेबर पेन शुरू होने या कोई और Complication होने पर हेल्थ सेंटर से तुरंत संपर्क करने में देर न करें
    • परिवार की सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी यह भी है की पर्याप्त पैसा और गाड़ी का इंतेज़ाम पहले से ही कर लें 
    • ईश्वर न करे किसी के साथ भी ऐसा हालात बने, इसलिए परिवार वालों को एक एसे व्यक्ति की पहचान कर ले जो Emergency पड़ने जैसे कंडीशन में ब्लड डोनेट कर सके 

    प्रेग्नेंसी और डिलेवरी के दौरान ख़तरे के संकेत 


    गर्भावस्था के शुरूआती महीनों में योनि से ब्लड बहना अत्यधिक मिचली और उल्टी, लेबर पेन शुरू होने से पहले योनि से ब्लड का रिसाव, हाई ब्लड प्रेशर, बेहोशी/या पेट में दर्द, कमज़ोरी महसूस होना, थक जाना साँस फूलना, पाँव में बेहद सूजन होना, दौरा पड़ना, पेशाब में जलन तेज़ बुखार या अन्य कोई बिमारी हो तुरंत अपने नज़दीकी हेल्थ सेंटर में जाकर समय पर हेल्प लें इससे आपका और बच्चे दोनों का जीवन सुरक्षित रहता है।

    नोट:- यह जानकारी जन हित में दी गयी है सबसे पहले आप अपने नज़दीकी सरकारी हेल्थ सेंटर में जा कर अपना रजिस्ट्रेशन कराएं और डॉक्टर की सलाह के अनुसार माँ व बच्चे की देखभाल करें !



    27 Mar 2017

    रिंगवर्म या दाद क्या है और यह कैसे होता है

    इस पोस्ट में हम रिंगवर्म या दाद क्या है और कैसे होता है इसके बारे में जानेंगे ! इसे Medically term में Dermatophytosis नाम से और Simple भाषा में Ringworm (दाद) के नाम से जाना जाता है यह त्वचा के कवक संक्रमण (Fungal infection) होता है यह Genrally मनुष्य और जानवरों दोनों में होता है इसका Infection शरीर पर देख सकते हैं जो कि Red patch (लाल धब्बा) त्वचा पर पड़ जाता है हमारे शरीर कुछ Common हिस्से एसे भी हैं जहाँ यह Infection ज़्यादा होता है जैसे सिर की त्वचा बाल, दाढ़ी, पेट और जांध (Thigh) के बीच का भाग, पावँ, तथा और भी कुछ Other हिस्से हैं।

    रिंगवर्म क्या है कैसे होता है रिंगवॉर्म काफी फेमस है आज कल !

    आज कल यह बहुत से लोगों को हो गया और काफी परेशान रहते है हर दस में से चार लोग इस से Infected है काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है इधर गर्मी का मौसम भी आ रहा है क्योंकि अगर त्वचा Infected है तो पसीना होने की वजह से ज़्यादा फैलता है जो की बहुत ही Irritating feel होता है और ऐसी जगहों पे हो जाता है और किसी से Share करने में भी Hesitation होती इसे बहुत बड़ी बिमारी तो नही कह सकते लेकिन यह अगर भयंकर रूप ले ले तो ज़िन्दगी दुश्वार हो जाती है तो आइये जानते हैं जो भी हमारे पास जानकारी है आपके साथ Share करते हैं कि यह क्या है और कैसे होता है ?

    कैसे होता है किस वजह से होता है !

    शरीर का गन्दा होना साफ़ सफ़ाई ना रखना क्योंकि जैसे- बिना हिफाज़त ज़्यादा दिन रखे लोहे में जंग लग जाती है वैसे हमारा शरीर भी है अगर ठीक से केयर नही किया गया तो दाद खाज तो होगा ही साथ में त्वचा से Related बहुत सी बिमारियों का सामना करना पड़ सकता है कुछ वजहें ! जिसेके कारण से हो जाता है जैसे- Bathroom या Toilet के नल में साफ़ पानी का ना आना, हमेशा बंद कमरा सीलन रहना, Public Swimming pool में काफी दिनों का पानी बदला नही गया हो, उसमे लिया जाये तो भी हो सकता है, क्योँकि गंदे पानी में Fungus वगैरह ज़्यादा रहते हैं, गीला कपड़ा पहनना, एक कपड़े को काफी दिनों तक पहने हुए रहना, गीले टॉवल का इस्तेमाल, गंदे फुटवेयर पहनना यह Common चीज़े हैं, जिसेसे रिंगवर्म होने का खतरा होता है तो दोस्तों इस तरह के कारण से रिंगवर्म होने का ज़्यादा Chance रहता है। 

    मुझे नही था पर कैसे हो गया ! 

    ringworm ke bare me jane सबसे Most important बात काफी दोस्तों से Mind में Qustion उठ रहा होगा यार मैं तो 100% खुद की Care करता हूँ, साफ सफ़ाई रखता हूँ, पानी में Antiseptic liquid डाल कर भी नहाता हूँ फिर भी मुझे कैसे हो गया तो मैं बता दूँ आप बिलकुल सही हैं अपने साफ़ सफाई रखी ! पर हुआ कैसे ? दोस्तों आइये इसे भी जानते हैं अगर किसी को Fungal infection है तो यह ज़्यादा Chance आप को भी हो सकता है आप उस व्यक्ति के Contact में आते हैं।

    ! किसी के कांटैक्ट में आना ! पर कैसे ?

    अगर आपके किसी दोस्त यार या Family members में से किसी को भी है और उनके इस्तेमाल किये हुए सामन Share करते हैं जैसे Mobile phone कपड़े बिस्तर कुछ भी इस्तेमाल हों और अगर उन्हें पहले से Fungal infection है और वह सामान Infected area के Contact में आया या उन्होंने खुजली कर उसी हाथ से सामान Touch किया तो वह सामान Infected तो हुआ साथ ही अगर वही सामान कोई और इस्तेमाल करने लगा ! बिना Clean किये ! तो Sure उसे भी हो सकता है Physical relation, अगर एक Partner को है और वह दूसरे के Contact में आता है तो यह भी एक कारण है।

    रिंगवॉर्म होने का कुछ कॉमन लक्ष्ण !

    • शरीर पर रेड पैच पड़ जाना फफोले,रैसेस जैसे दिखना, 
    • रिंगवर्म नाम ही इसका शेप रिंग जैसा होता है, 
    • हमेशा खुजली व जलन जैसा अहसास होना,
    •  ज़्यादा खुजली करने पर हल्का पानी निकलने लगता है, 

    घरेलू देखभाल कैसे करें ?

    • Regular अपनी त्वचा को Clean और Dry रखे,
    • Ringworm जिस एरिया पर है ज़्यादातर कोशिश करें की कपड़े से दूर रहे, 
    • अगर आप कपडे को दूर नही रखपा रहें हैं, तो Affected Area को Bandage कर के रखें,
    • रोज़ अपने कपड़े बदलते रहें, आसपास खूब साफ़ सफ़ाई रखे और इन्फेक्शन बढ़ने से रोकें,
    • इस्तेमाल किये कपड़े को किसी अच्छे Antiseptic liquid में भिगो कर कुछ देर रख दें और खूब अच्छी तरह से धोएं,
    • अगर आपका Immune system कमज़ोर है, तो ऐसे लोगों से दूर रहें जिन्हें पहले से Ringworm है,   
    • इन्फेक्शन किसी और को न हो इसके लिए अपनी Personal चीज़े किसी और से Shar न करे जैसे Clothes or Hair Brushes etc,
    • साबुन का इस्तेमाल बिलकुल भी न करें,
    नोट :-अगर आपको एसे लक्षण दिखे तो अपने नज़दीकी डॉक्टर से एक बार ज़रूर सलाह ले कर कन्फर्म कर लें! 

    26 Mar 2017

    एनीमिया क्या है इसका लक्षण कैसे पता करें

    हमारे शरीर के ब्लड में RBC (Red Blood Cell) या Hemoglobin की मात्रा किसी भी Reason से कम हो जाना उसे Anemia कहते हैं आम तौर पे शरीर में ख़ून की कमी भी कहते हैं Body के सभी Cells में Oxygen ज़रूरत होती इसमें Hemoglobin का बहुत ही Important काम होता Oxygen शरीर में पहुचना ! यदि किसी भी व्यक्ति को Anemia हो जाता है तो इसका Effect शरीर पर पड़ने लगता है 

    शरीर में Blood की कमी/Anemia होने की वजहें जानें,

    Iron की कमी / Deficiency of iron :- Iron शरीर को Healthy बनाता है शरीर में Iron की कमी होने के कारण Anemia होने का खतरा रहता है क्योँकि शरीर में Iron (लौह-तत्व) की कमी होने की वजह से शरीर में मौजूद Bone Marro ज़रूरत के मुताबिक़ Hemoglobin नही बना पता, तथा RBC का Shape-Size छोटा हो जाता है और अपने नार्मल कलर से Deffrent हो जाता है।

    बीमारी / Disease :- कुछ बीमारियों की वजह से जैसे अल्सर, कैंसर, Bone marrow में रोग, और ख़ास कर महिलाओं Anemia पाया गया है Periods और Pregnancy में रक्तस्राव, या फिर दर्द में ज़्यादा Pain Killer लगातार इस्तेमाल करना, दर्द नाशक दवाएं आराम तो देती हैं पर इसका Bad effect है।

    रक्त दान / Blood Donate :- किसी ज़रूरत मंद को Blood Donate करना बहुत ही अच्छा काम है दूसरों की ज़िन्दगी बचाई जा सकती है, परंतु ऐसे व्यक्ति जिनमे Hemoglobin की मात्रा पहले से काम हो या नार्मल भी हो Blood Donate करने के बाद ठीक से खान-पान न करे Anemic हो सकते है। 

    आनुवांशिक / Genetic:- Thalassemia और Sickle Anemia टाइप Genetic रोगों के कारण RBC में Defect होने से बहुत जल्द ही Break हो जाती है जिसके कारण Body में Blood की कमी होने लगती है और व्यक्ति बहुत जल्द कमज़ोर दिखने लगता है। 

    रक्तस्राव / Bleeeding :- एक्सीडेंट में ज़्यादा Blood का बहना, पाइल्स/बवासीर, घाव वा शरीर पर किसी वजह से चोट लगना, ये तमाम कारण हैं जिस वजह से शरीर में ख़ून बहार निकल जाने से खून की मात्रा कम हो जाती है ऐसे में तुरंत नज़दीकी चिकित्सक के पास जा कर उचित सलाह लेनी चाहिए।

    एक Normal व्यक्ति में कितने संख्या में RBC/HB होता है, 

    Emedicine.medscape.com के अनुसार एक स्वस्थ्य वयस्क पुरुष (Male) में Genrally 14 .0 से 17.5 mg/dl मिलीग्राम/डेसीलीटर, और एक स्वस्थ्य वयस्क महिला (Female) में 12.3 से 15.3 mg/dl के बीच होता है बच्चों का उनके उम्र और लिंग पर Depend करता है कि लिंग क्या हैं और कितनी उम्र हैं 

    Risk factors / जोखिम के कारण !

    कुछ लोग इन Catagory में आते हैं उनमे लोहे (Iron) की कमी से होने एनीमिया का खतरा बढ़ सकता है।

    Women / महिला :- क्योंकि मासिक धर्म के दौरान महिलाएं खून स्राव होता हैं, सामान्य रूप से महिलाओं को लोहे (Iron) की कमी वाले एनीमिया का अधिक खतरा होता है।

    Vegetarians / शाकाहारी :- जो शाकाहारी हैं मीट मांस अपनी Diet में नहीं लेते उन्हें भी Anemia हो सकता है अगर वह अतिरिक्त खाद्य पदार्थों से लौह (Iron) की पूर्ति नही कर पा रहे हों तो !

    Continue blood donation / लगातार रक्त दान करना :- जो लोग लगातार रूप से Blood donate करते हैं उनमें लोहे (Iron) की कमी की Anemia का खतरा बढ़ जाता है Because blood donation की कमी से शरीर में खून की मात्रा कम हो जाती है, रक्त दान करने से शरीर में हीमोग्लोबिन कम होना एक Temporary समस्या हो सकती है यदि Blood donate करते समय आपको यह बताया गया है कि आप में हीमोग्लोबिन की कमी है और आप इस कारण रक्त दान नही कर सकते, तो अपने डॉक्टर से पूछें इसका निदान कैसे करे।

    Infants and children / शिशुओं और बच्चों में :- वे नवजात बच्चे खास तौर से, जो कम Weight वाले या जब जन्म होना हो उससे पहले पैदा हो जाते हैं, और माँ के दूध से Sufficient मात्रा में लौह (Iron) नहीं प्राप्त करते पाते हैं, उनमे Iron की कमी का खतरा रहता है बच्चों के शारिरिक विकास के दौरान बच्चों को अतिरिक्त Iron की बहुत जरूरत होती है, यदि बच्चा Healthy न हो और Proper तरीक़े से Diet नहीं ले रहा तो उसे एनीमिया का खतरा हो सकता है।

    कुछ बीमारियों की वजह से शरीर में RBC बनना कम हो जाता है जिसकी कारण से Anemia बहुत जल्दी होता है एनीमिया शुरुआत में यह धीरे-धीरे होने लगता है और बाद में भयंकर रूप में बदल जाता है  ! जैसे !

    1. कैंसर
    2. सिरोसिस
    3. ल्यूकेमिया
    4. लीड पॉइज़न
    5. गुर्दे की पुरानी बीमारी
    6. अप्लास्टिक एनीमिया
    7. लोहे की कमी से एनीमिया
    8. विटामिन की कमी से एनीमिया
    9. आपके खाने में लोहे (Iron ) की कमी
    10. लोहे को Absorb करने की क्षमता कम होना

    एनीमिया का लक्षण / Symptom of Anemia !

    1. सर में दर्द 
    2. सांस फूलना
    3. सीने में दर्द रहना
    4. बेहोशी, चक्कर आना 
    5. सांस लेने में परेशानी
    6. शरीर का पीला पड़ना
    7. पैर अपने आप हिलना
    8. हाथ पैर का ठंडा पड़ना
    9. सांस लेने में तकलीफ
    10. शरीर का रंग पीला पड़ना
    11. अत्यधिक कमज़ोरी व थकान
    12. तेजी से दिल की धड़कन बढ़ना घटना

    आयरन की कमी से लड़ने के लिए उचित खाद्य पदार्थ,

    Anemia दूर करने के लिए सबसे पहले एक संतुलित Diet लेने की आवश्यकता है जिसमे पर्याप्त मात्रा में Iron हो जैसे कि अंकुरित फलियां, बीट्स, ब्रोकोली, ब्रूसेल, रेड मीट, लिवर, मछली, मक्का, हरी सेम, सभी प्रकार के गोभी, मिठाई, मटर, टमाटर, मसूर, बीन्स और हरी पत्तेदार सब्जियां, पालक, नारियल सूखे फल, किशमिश और खुबानी इत्यादि को अपनी Diet में शामिल करके एनीमिया से छुटकारा पाया जा सकता है ।

    नोट:- एनीमिया क्या है इसका लक्षण कैसे पता करें इसकी जानकारी अपने नज़दीकी डॉक्टर से संपर्क कर सलाह लें और अगर ऎनेमिक हैं तो उपचार करने में जुट जाये!