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चिड़िया ने अपना बदला लिया

who-has-revenge-on-elephanवाराणसी के पास के घाना जंगल था उस जांगले में हाथियों का एक झुण्ड रहता था एक हाथी ने बच्चा दिया वह बड़ा होकर अस्सी हज़ार हाथियों का राजा बना उसका शरीर बहुत ही सुन्दर एवं बलशाली था वह शांत एक बुद्धिमान था हाथियों के चरने के स्थान पर एक बटुकिया चिड़िया ने अण्डे दिए, उसने अण्डों  को सेया, चूज़े बाहर आये, अभी उनके पंख नही निकले थे वे उड़ नहीं सकते थे, उसी समय हाथियों का दाल वहाँ आ पहुंचा लाटुकिया ने सोचा - अगर ये हाथी का झुण्ड यहाँ से गुज़रेगा तो मेरे बच्चों को कुचल कर मारे जायेंगे, मुझे इनसे बच्चों सेफ़्टी के लिए प्रार्थना करना चाहिए, 

वह हाथियों के लीडर के पास गयी, और अपने दोनों पंख जोड़कर प्रार्थना करने लगी। 
हे हाथियों के राजा मैं पंख जोड़कर आपको नमस्कार करती हूँ, प्लीज़ आप मेरे बच्चों को मारने से बचा लें ।
बटुकिया ! मैं तेरे बच्चों की रक्षा करूँगा ! फ़िक्र मत करो ! वह बच्चों के ऊपर पैर फैला कर खड़ा हो गया अस्सी हज़ार हाथी इधर-उधर से चले गए "फिर उसने कहा" हमारे पीछे एक अकेला हाथी आएगा, और वह मेरा कहा नही मानता, उसके आने पर तू अपना बचाव खुद करना, इतना कहकर वह चला गया ।

उधर हाथी जो बहुत अड़ियल टाइप का था वह आया, तो चिड़िया ने फिर अपने पंख जोड़कर, विनिती करने लगी, मैं तुम्हें नमस्कार करती हूँ। प्लीज़ मेरे कमज़ोर नाज़ुक से बच्चों को मत मारो '
"बटुकिया ! तू तो बहुत छोटी सी है, तू मेरे क्या कर लेगी, मैं तेरे बच्चों को मरूँगा।
तू क्या तेरी जैसी लाखों चिड़ियों को अपने पैरों के नीचे कुचल दूंगा, यह कहकर चिड़िया के बच्चों के ऊपर पाँव रखकर उन्हें कुचलता हुआ, अपने मूत्र से नहलाता हुआ शोर मचाता चला गया, चिड़िया पेड़ की डाल पर बैठी रोती हुई सब देखती रही, और बोली आज तो तू बड़े घमंड में मेरे बच्चों को मर कर चला गया, लेकिन कुछ दिन बाद मैं तुझे अपना करामात दिखाउंगी ।

तू नही जनता की शरीर की ताक़त से ज़्यादा बलवान ज्ञान की शक्ति है, अक़्ल से मरूँगी, अपने बच्चों का बदला ज़रूर लूँगी ! हाथी से बदला लेने के लिए चिड़िया एक कौवे की सेवा करने लगी, कुछ दिनों बाद कौवे ने कहा- तूने मेरी बहुत सेवा की बता मैं तेरे लिए क्या करूँ ? स्वामी 'मैं चाहती हूँ की आप अपनी चोंच से उस पापी हाथी की आँख फोड़ दें ।

उसने अच्छा कह कर कहकर स्वीकार किया, फिर चिड़िया से के मक्खी की सेवा कर उसे भी खुश किया,मक्खी ने कहा तूने मैं तेरे लिए क्या करूँ ? उस कौवे द्वारा हाथी की आँख फोड़े जाने पर तुम उसमे अंडे दे दो ! मक्खी ने ऐसा करना स्वीकार किया, फिर चिड़िया ने एक मेंढक की सेवा की ! मेढक ने भी पूछा तुमने मेरी इतनी सेवा की बताओ मैं तुम्हारे लिए क्या करूँ ?

जब हाथी अंधा होकर पानी के लिए घूमने लगे तो तुम पहाड़ पर जा कर टर्र-टर्र की आवाज़ करना, तुम्हारी आवाज़ से हाथी पानी होने का अंदाज़ा लगाकर जब पहाड़ की छोटी पर चढ़ जाये तब तुम घाटी की तरफ थोड़ा नीचे जाकर टर्र-टर्र की आवाज़ करना बस इतनी ही मैं तुमसे आशा रखती हूँ मेढक ने ऐसा करना स्वीकार किया ।

एक दिन मौका पाकर कौवे ने हाथी की आँख फोड़ दी ! मक्खी ने उन आँखों में अण्डे दिए उसकी आँखों में मखियाँ काटने लगीं ! वह पानी ढूंढता हुआ इधर-उधर भटकने लगा, उसी मेंढक ने पहाड़ पे जाकर टर्र-टर्र की आवाज़ लगाई उधर पानी होगा ऐसा जानकर हाथी आवाज़ सुनता हुआ पहाड़ के चोटी की ओर बढ़ा ! जब हाथी पहाड़ चढ़ गया तब मेंढक ने नीचे उतर कर पूरा ज़ोर लगा कर टर्र-टर्र की आवाज़ करने लगा, इतने में हाथी ने सोचा पानी उस आवाज़ की तरफ है वह पहाड़ से उतरने लगा ! आँखे ना होने के कारण दिखता तो था नही । इतने में वह फिसल कर खाई में जा गिरा ! खाई इतनी गहरी थी की वह गिरते ही मर गया ।

 चिड़िया हाथी के शरीर पर चल फिर कर सुकून की सांस भरी और हाथी को मरा देख चिड़िया बहुत खुश हुई ।

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