Wednesday

बिना जज टैक्सी ड्राइवर और कोर्ट मुक़दमें का फ़ैसला

texi-driver-jaj-vakeel-aur-court-ka-mukadmaCourt का मुक़दमा मुलजिमों, वकीलों, गवाहों, और दर्शकों से भर गया था, 11:30 हो चुका था और Court की Chair खली थी, और इस Court के सामने विक्रम Taxi Driver की आज बारहवीं Hearing (पेशी) थी, पिछले चार Month से वह ग्यारह बार Court के सामने Present किया गया ,और हर Month पेशी की अगली तारीख़ पर ताल जाती थी, और इसके Case की बारी नही आती थी - पिछले चार Month से ग्यारह दिन वो Taxi नही चला सका था, और जब Taxi नहीं चलता था, तो घर का खर्च भी नहीं चलता है, सिर्फ Wife की ज़बान चलती है।

कोई बड़ा मुकदमा नहीं था इसका, इसने शहर के सबसे बड़े आदमी की कार को बड़ी रेस में पछाड़ा था इसके बावजूद भी इसने उस बड़े आदमी को अपने से आगे ना बढ़ने दिया, हालाँकि उस बड़े आदमी की गाड़ी इसके पेट की तरह भरी थी, और इसके Desire की तरह लम्बी और इसका रंग एक Hussy woman के make-up की तरह भड़कीला था, तो कभी विक्रम की Taxi ने मात दे दी, इसमें बकरम की Taxi से ज़्यादा इसके Speed का दख़ल था, Because मशीन तो इंसान के हाथों से ही चलती है।

बड़े आदमी कभी यह भूल जाते हैं, City का सबसे बड़ा आदमी एक मामूली Taxi Driver की जुर्रत पर ख़फ़ा हो गया था, और अगले चौक पे रुक कर इसने Traffic Inspector से इस कम हैसियत वाले Taxi Driver के ख़िलाफ़ Complain कर दी थी, विक्रम को इस Court से ज़्यादा से ज़्यादा 10 रूपये की Penalty होती But वह बड़ा आदमी बहुत अड़ियल Type का था, किसी तरह वो Court में पेशी के समय हाज़िर न होता था But बकरम को Court में हाज़िर हुए आज 11 दिन हो गए थे। 

इस ने घबरा कर अपने वकील से पूछा ? क्या आज जज साहब नहीं आएंगे,
क्या मालुम ! इसके वकील ने इसे बड़े Attitude से इसे जवाब दिया Because विक्रम ने अपने वकील को हर पेशी पर 3 रुपये देने का Promise किया था, और अपनी समझ में इसने बड़ा सस्ता सौदा Fix किया था. 
विक्रम का Guess था कि एक दो पेशियों में फैसला हो जायेगा। 

इसे क्या मालूम था कि Matter इतना लम्बा खिंचेगा कि इसे 3 के बजाए 33 रुपये देने पड़ जायेंगे, और वकील इसलिए इसे बड़ी Attitude से जवाब दे रहा था, आखिर 3 रुपये वाले को किस तरह से जवाब दिया जा सकता है, अब अगर 20-30 रुपये वाली बात होती तो वक़ील भी मुस्कुराता, हर वकील की मुस्कराहट उस के होंठों में छुपी रहती है, और इस मुस्कराहट हो बाहर लाने के लिए अलग-अलग Rate हैं किसी वकील की मुस्कराहट 5 रुपये पर खुलती है तो किसी की 50 रुपये तो किसी की 1000 रुपये पे खुलती है। 

वकील के मीटर और Taxi के Meter में कोई फर्क नहीं, विक्रम बड़ा Despair होके सोचने लगा, अब मैं इस ज़ालिम को 33 रुपये दे चुका हूँ मगर यह मुझसे कभी सीधे मुह बात नहीं करता Because मैं 3 रुपये वाला Renter जो हूँ Penalty तो मुझे तो 10 रुपये की होगी पर 33 रुपये दे चुका हुँ पेशकार से पूछिये अदालत आज रहेगी या नहीं, मेरा Taxi का नुक्सान होता है बकरम में बड़े उदास हो कर अपने वकील से पूछने को कहा ,,

lawyer-ask-qustion-for-the-caseवकील ने घड़ी देख कर कहा, ओह्ह 12 बजने को हैं मेरा एक मुक़दमा Court में और है मैं वहां जाता हूँ तुम यही Court के अंदर बैठे रहो या खड़े रहो, मगर तुम रहो यही अगर तुम्हारा बुलावा आ जाये तो मुझे फौरन Court से बुला लेना वकील अपना बड़ा सा Dress लहराता हुआ और बोरियों की तरह लटकती हुई पतलून को झड़ता हुआ Court number 2 की तरफ चला गया बहुत पहले इसने एक Advocate की बदसूरत लड़की के साथ शादी किया था यह सोच के की इस का ससुर अपने दामाद Advocate बना देगा, मगर शादी के कुछ ही महीने बाद वह Advocate ही चल बसा, फिर अगले दस साल में इसके बच्चे हुए और इसके कोट का कालर फट गया। 

तीन रुपये में तुम क्या कर सकते हो, जब Life में खटास ही खटास हो तो ज़बान पे मिठास कहा से आएगी, वकील ने Court number 1 से जाते हुए सोचा, विक्रम ने पहले तो Court reader से court के बारे में पूछने की कोशिश की को उसने इस झड़क दिया वह डर के मरे किनारे हो गया और काफी देर तक अपनी दाढ़ी को खुजाता रहा इसकी दाढ़ी बड़ी खूबसूरत थी ओए छोटी थी और इसकी आँखे बड़ी बड़ी थी इसके खानदान के सभी मर्दों को आँखें बड़ी बड़ी और खूबसूरत और छोटी छोटी दाढ़ियाँ थी। 

विक्रम ने चारों तरफ बड़ी बेबसी से देखा, Suddenly उसे Court room के Left side में उसे Judge साहब का नौकर नज़र आया Judge साहब जब अपने Private रूम से निकल कर Court के room में जाते थे। तो यह 2 कदम आगे बढ़ कर पुकारता था, एक तरह से Judge के आने का ख़बर देता था ,,
फिर Judge साहब अपना Black चश्मा और Black gown और दो फंदों वाला कालर पहने हुए तशरीफ़ लाते हुए और अदालत उनके Respect में खड़ी हो जाती है और उस वक़्त तक लोग खड़े रहते हैं।

जब तक की Judge साहब Court के ऊँचे chair पर बैठ न जाये,
Court बहादुर कब आयेंगे ,
अर्दली ठीक ग्यारह बजे आ जाते हैं न जाने आज क्या बात हो गयी है, Maybe आज तबीयत ख़राब हो,
तबियत खराब हो गयी है तो Court नही लगे गी हैं,
कोई दूसरा Judge नहीं आएगा?
कभी-कभी आता है जब पहला Judge छुट्ठी पे चला जाता है ,मगर आज क्या होगा, क्या मालूम ! अभी थोड़ी देर में Judge साहब का Phone आएगा। 

अभी अर्दली के मुह से बात पूरी भी न हुई थी की Telephone आ गया और Telephone सुनने के लिए Judge साहब के Private रूम में घुस गया, विक्रम भी इसके पीछे-पीछे चला गया और Telephone सुने लगा बकरम कमरे के अंदर खड़ा हो के इधर उधर देखने लगा साफ़ सुथरा कमरा था। एक तरफ Judge के खाने की मेज़ एक तरफ आराम करने की जगह थी लोहे की आलमारी थी, और एक तरफ Judge साहब की मद्रासी पड़गी जिसे बहन कर को Court के अंदर तशरीफ लाया करते थे। 

अर्दली (orderly) टेलीफोन सुन कर विक्रम की तरफ मुड़ा और बोला ! आज जज साहब नहीं आएंगे Because उन्हें जुखाम है But फ़ौरन Tone बदल कर बोला तुम अंदर कैसे आये ? नहीं मालूम था की इस कमरे अंदर मना है - चलो बहार निकलो ..!
अर्दली गुस्से से विक्रम की तरफ बढ़ा विक्रम गुस्से से अपना मज़बूत हाथ इसके मुह पे रख दिया,

Court number 5 का कमराः तमाशा देखने वालों और वकीलों से भरा था Because आज Judge की कुर्सी पर एक नया Judge बैठा था जिसे आज से पहले किसी ने न देखा था और वकील लोग ज़्यादा Excited थे कि Judge साहब किस तरह Judgment करते हैं ,इसकी जानकारी का क्या हिसाब किताब। इस वक़्त मुक़दमा बाला चन्द्र का था बाला चन्द्र ने अपने घर का एक कमरा एक बूढ़ी औरत और उसके बेटे को किराये पर दे रखा था बूढ़ी औरत और उसका बेटा दस साल से इसके कमरे में चले आ रहे थे और बड़े Respect के साथ इस मकान का Rent time पर दे दिया करते थे, But बूढ़ी औरत का जवान बेटा अपनी मिल में किसी Accident का शिकार हो गया और चल बसा वो बूढी औरत कुछ Month से Rent नही दे पाई थी इस वजह से बाला चन्द्र Court की मदत से उस बूढी औरत को कमरे से बाहेर निकालना चाहता था।

judgement-story-alphabet-word-imagesJudge ने बाला चन्द्र से पूछ ? तुम्हारे घर पे कितने कमरे हैं''
दस कमरे हैं बाला चन्द्र ने जवाब दिया-"
और तुम्हारे खानदान में कितने आदमी हैं"
मैं अकेला हूँ "
और तुम्हारी उम्र कितनी है '
70 बरस की उम्र है हुज़ूर '
तप 70 बरस के बूढ़े को 10 कमरे किस लिए चाहिए "
Judge ने पूछा -?क्या तुम 10 कमरों में से 1 कमरा इस बूढ़ी औरत को नहीं दे सकते जिसका जवान बेटा कुछ महीने हुए कारखाने में मारा गया ,,
बाला चन्द्र का वकील बोला - हुज़ूर Section number फला-फला के तहत से क़ानून कहता है "
और इंसाफ कहता है।

"नया Judge irritate होके बोला - और बाला चन्द्र का वकील वही खड़े-खड़े डर के सहम गया फिर नए Judge ने मुस्कुरा के बाला चन्द्र की तरफ देखा जो 70 बरस का दुबला पतला और कमज़ोर आदमी था जिसके चेहरे पर 70 बरस की कंजूसी से होने वाले जज़्बात का दाग़ थे वह अपने माथ सिकोड़े चुपचाप सबके सामने खड़ा था Judge साहब ने मुस्कुरा कर बाला चन्द्र की तरफ देखा और कहा '' तुम्हारे घर में कितने नौकर हैं ''
एक भी नहीं 'बाला चन्द्र ने जवाब दिया ''
क्या तुम्हे तन्हाई महसूस नहीं करते ,
वकील को बड़ी हैरत हुई - वह Judge साहब से पूछना चाहता था की वो किस तरह कि उन सवालों से मुक़दमे का क्या Connection है।

मगर कुछ कहने की हिम्मत न हुई,
कभी-कभी अकेला Feel करता हूँ''
क्या तुम कभी Feel करते ..! की कोई तुम्हारा कमरा झाड़ू पोछा करे तुम्हारे कपड़े वक़्त से निकल दे तुम्हारे ,नहाने का पानी रख दे, तुम्हारे लिए Lunch तैयार दे. और रात सोते वक़्त आहिस्ता से तुम्हारा पैर दबा दे,
जी महसूस करता हूँ ,
और अगर कोई इन खिदमतों के बदले तुम्हारे 10 कमरों के बड़े मकान में सिर्फ एक कमरा और दो वक़्त का खाना मगे तो क्या तुम इंकार कर दोगे,
बाला चन्द ने Hopeless हो कर कहा ''मगर हुज़ूर आज कल ऐसा इंसान दुनिया में कहा मिलते हैं, इसलिए मैं नौकर नही रखता। 

बूढी औरत का चेहरा ख़ुशी से खिल गया, और दोनों हाथ फैला कर Judge को दुआएं देने लगी ,
फिर इस ने बाला चन्द से डांट कर कहा, अब घर चल तेरे खाने का वक़्त हो गया,
बूढी औरत ने बूढ़े को हाथ से पकड़ लिया, और सारी अदालत खिलखिला के हंस पड़ी, बाला चन्द के वकील ने बहुत समझाया, बाला चन्द तुम घबराओ नही "मैं तुम्हारे फैसले के खिलाफ अपील करुगा''
बाला चन्द ने कहा। अब कोई ऐसा काम नही करोगे तुम ! यह फैसला मुझे Accept है,,
फिर वो बूढी के तरफ देखा और मुस्कुराया जैसे सुखी धरती पे निर्मल जल की धरा छूट रही हो ,
अदालत के कटघरे में एक बहुत खूबसूरत लड़की खड़ी थी, जैसे किसी ने खूबसूरत गुलदसता रख दिया हो, उसने पीले फ्रॉक पहने थी। 

Judge ने पूछा ?,तो तुम अपने Husband से Divorce चाहती हो ,
जी हाँ। 
क्या तुम्हारा Husband बेकार है ?
मेरे Husband के मुह से Smell आती है 
क्योँ आती है। 
इसे हर रोज़ खाने के साथ भुनी हुई लहसुन (Garlic) कहने का बहुत शौक है ,
तो तुम उसे रात को Toothbrush करने को क्यों मजबूर नहीं करती 
मैं तो कहती हु पर यह मानता नहीं ,
"अगर तुम सोने से पहले एक Toothpaste लगा कर इसके मुह में दे दिया करो तो क्या दांत साफ़ करने पे मजबूर नहीं हो जायेगा ''
लड़की चुप हो गयी फिर बोली-''और हुज़ूर यह आदमी रोज़ जूतों समेत मेरे बिस्तर में घुस आता है" 

तो भी जूतों समेत सो जाया करो Judge ने कहा ..बहुत आसान Idea है - दो दिन में ये आदत ठीक हो जाएगी ,
मगर उस लड़की का वकील बोला। ताज़िरातेहिंद की Section फला-फला के तहत अगर Husband ,,
तुम चुप रहो Judge ने वकील को डाँटते हुए कहा, Husband और Wife के बीच में बोलने वाले तुम कौन होते हो -''फिर Judge typist को अपना फैसला लिखवाते हुए कहा लिखो अगर Husband जूते पहन कर बिस्तर में घुसे तो Wife चप्पल पहन कर सोने का पूरा हक़ है Case dismiss !

अब कटघरे  में चार्ली टेक्सटाइल का मालिक खड़ा था, वह बेहद लम्बा और पतला था
इसके कानो में सफ़ेद हीरे जगमगा रहे थे और वह अपनी सफ़ेद रेशमी कमीज़ और धोती पहने हुए था इसकी हाथ की अंगुलिया कटघरे पर राखी हुई थी, बड़ी लम्बी नरम और नाज़ुक अंगुलिया दिखाई देती थी वह ऐसे आदमी की अंगुलियां दिखाई देती थी जिसने ज़िन्दगी भर नोट गिनने के सिवाए कोई काम न किया होगा और यह अदालत के कटघरे में आराम और सुकून से खड़ा था।

Judge ने कहा तुम Accept करते हो की तुम्हारे मिल में 
काम करने वाले एक मज़दूर का हाथ मिल की एक मशीन से कट गया
जी ! हाँ। 
और इसके बाद भी तुम उस मज़दूर को जुरमाना देने से इंकार करते हो ,
जी ! क्योँ?
क्योँ कि मज़दूर का हाथ इसकी लापरवाही से कटा है ,
मेरी मिल की मशीन खराब नहीं है,
मेरी मिल-वह तुम्हारी मिल कैसे हुई,
हुज़ूर मैं इस मिल का मालिक हूँ..
तुम इस मिल के मालिक कैसे हुए ?
हुज़ूर मैंने इस पर रुपया लगाया है 70 लाख रुपया ,
और कितना कमा चुके !

तीन करोड़ 44 लाख अगर इस मिल में एक भी मज़दूर न होते तो Profit कितना आता, यह किए हो सकता है हुज़ूर !अगर मिल में मज़दूर काम न करें तो Profit खा से आएगा, तुम Accept करते हो की तुम्हारा 70 लाख रुपये के बजाए खुद कोई चीज़ नहीं है, जब तक इंसान के हाथ इस को न चलायें, मिल मालिक ने झिझकते हुए कहा, यह तो सही बात है हुज़ूर तो जो हाथ Profit देते हैं तो उन्हें Profit का हक़ दार क्योँ न समझा जाये। 
इसके हाथ अगर किसी गलती से तुम्हारी या इन की चूक से कट जाये तो तो  इन हाथो के मालिकों को ज़िन्दगी भर पेंशन क्योँ न दिया जाये। 

मिल मालिक का वकील चिल्लाया '' Section फला-फला के तहत मिल मालिक ,,
किसी शरीफ आदमी की तारीफ को वकील साहब, Judge ने गरज कर मिल मालिक के वकील से कहा,
फिर मुद कर Typist से बोला लिखो फैसला '' टेक्सटाइल मिल के मालिक ने 70 लाख रुपया लगा कर 3 करोड़ 44 लाख रुपये वसूल कर लिया लहज़ा अपना रुपया सूद के साथ वापस पा चुका है" आज से यह मिल इसका नहीं है बल्कि उन लोगों का है जिन्हो ने आज तक अपने हाथों की मेहनत की पूजी लगाई है और आज तक लगते आ रहे इसके अलावा मिल मालिक अपने हाथो को इस मिल में नही लगता और इस पर मुनाफे का पूरा दावे दार बनता है इसलिए अदालत यह फैसला करती है की मिल मालिक के मुनाफे में से हाथ कटे हुए मजदुर को पूरी ज़िन्दगी Pension जारी की जाये और मिल मालिक के दोनों हाथ काट दिए जाये क्योँकि वो हाथ कोई काम नहीं करते और हमारे देश में सिर्फ काम करने वाले हाथो की ज़रूरत है। 

क्या बकवास है,मिल मालिक ज़ोर से चिल्लाया -
यह Judge है या कोई पागल आदमी है 'बहुत से वकील गुस्से से बोल पड़े'
नया Judge कुछ कहने वाला ही था कि एक फटीचर सा वकील अपने फाटे कलर को सहलाता हुआ Court में Enter हुआ और कहने लगा,
इसे पकड़ लो यह Judge नहीं है यह तो मेरे Client है बकरम,
Taxi वाला यह Judge की कुर्सी पे क्योँ और किस तरह बैठा है ,
Court number 2 में विक्रम Taxi वाले को पेश किया गया तो अदालत ने इससे पूछा "तुम्हारा नाम ?
विक्रमादित्य। 
age ?
दो हज़ार साल"
क्या काम करते हो ?
Taxi चलता हूँ। 

तुम ने अदालत के Absence में ये हरकत क्यों की ?अदालत Number 2 ने पूछा ?
सब लोग हैरत से विक्रम टैक्सीवाले की तरफ देखने लगे, देर तक उसका सर झुका रहा फिर धीरे से सर उठाया और बोला हुज़ूर ज़िन्दगी Taxi की रफ़्तार से भागती है, लेकिन क़ानून अभी तक बैल गाडी की रफ़्तार से चलता है But मैं बेक़सूर हुँ हुज़ूर मैं अदालत की कुर्सी पर नहीं बैठा था, मैंने तो बस इसके Accelerator पर पाओं रखा था।

कुछ महीने की क़ैद बा मुशक्कत ''अदालत ने अपना फैसला सुनाया, और पुलिस के दो सिपाही विक्रमादित्य को पकड़ कर अदालत से बहार ले गए।

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