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स्कूल टाइम और बचपन की प्यारी यादें

School-days-sweet-memories-childhood-essay-in-hindiकिसी ने सच ही कहा है स्कूल ईश्वर के घर जैसा होता :- है क्योकि जैसे ईश्वर का घर सबके के लिए होता है वैसे ही स्कूल भी वहाँ कोई बड़ा छोटा नहीं, अमीर फैमिली से हो या गरीब सब बच्चे एक जैसे स्टूडेंट की तरह ही दिखते एक जैसा ड्रेस पहनते, एक साथ पढ़ते खेलत, इंटरवल में सब खाना खाते, खेतले मस्ती करते एक ही Campus के अंदर एक समान माहौल बहुत ही हैप्पी Moment होता है जो हर किसी की लाइफ में ये पल आता है।

यह लाइफ का गोल्डन पार्ट होता है :- जनमे स्कूल टाइम वाली अच्छी लाइफ और प्यारी यादें तो होती हैं साथ ही खूब सारी मस्ती, पढाई, खुराफ़ात सबका पिटारा भरा होता है दोस्तों स्कूल टाइम में अक्सर हम यही सोचते थे स्कूल ना जाना पड़े आज छुट्टी होती तो कितना मज़ा आता बुख़ार होने का बहाना पेट में  दर्द, पैर में चोट लगने का बहाना तमाम तरह के बहनों की खोज करते रहते थे, "लेकिन वही सब बाते आज याद करने में बहुत अच्छा लगता है।

स्कूल टाइम की कुछ बातें अब समझ आती हैं,

पापा मम्मी सुबह सुबह जब उठाते थे :- हमारा उठने का बिलकुल मन नहीं करता था सोचते थे और सोने को मिले, बिना जगाये उठते ही नहीं थे पर अब ऑफिस/काम पे जाना है बिना कहे ही तैयार होकर निकल जाते हैं "टीचर्स और पैरेंट्स" हमारी लाइफ के ऐसे मार्ग दर्शक होते हैं जिनकी प्रेरणा से हम ना जाने कितनी बातें सीख लेते हैं जिससे शब्दों में बयाँ नही किया जा सकता।

दोस्तों पैरेंट्स का प्यार डांट फटकार और गुस्सा :- यह हमारी लाइफ को वो बातें महसूस करा देती हैं जिससे हमारी बढ़ती उम्र में बहुत मदद ग़ार साबित होती हैं । क्योँकि दोस्तों क्या होता है हमारे बचपन में इन सब चीज़ो से जब सामना हो जाता है, तो आगे की लाइफ में कोई बात नयी नहीं लगती ! बस फील होता है ! "यार ये तो" स्कूल/कॉलेज वाली लाइफ में मेरे साथ हो चुका है उस बात पे डांट, फटकार पड़ी थी।

लाइफ बड़ी ही Complicated होती जा रही है:- अचानक से कोई कुछ कह दे तो मन बहुत दुखी तो होता ही है, लाइफ में अच्छे बुरे Situation दोनों को डील अच्छे से करना चाइये, हमे जैसा माहौल हो वैसे खुद को ढाल लेना चाइये (ख़ास कर अच्छी आदतों में) यह तमाम बातें पैरेंट्स और स्कूल दोस्त यार के बीच ही में हम सीखते हैं एक बात तो है हर चीज़ो का एक वक़्त होता है जब तक समझ में आती हैं तो वो लम्हें गुज़र चुके होते हैं ।

आप सभी दोस्तों को DEDICATE कर रहा हूँ,

article on school life is the best lifeअब आप यह पढ़ और फील करें वो स्कूल/कॉलेज की यादें :- जहां हम पढ़े वहां की धूप बहुत अच्छी लगती थी और अब हम AC में भले ही भी बैठ रहे हों पर वो बात नहीं रही, वहां घाँस पर मज़े से बैठना अच्छा लगता था अब ऑफिस की कुर्सी पर बैठने पर वो सुकून कहा मिलता है।

कैम्पस के बहार समोसे वाली दुकान :- जब हम भीड़ में घुस कर समोसे ख़रीद कर खाते थे उसमें जो स्वाद आता था अब बड़े बड़े रेस्टोरेंट के पिज़्ज़ा बर्गर में वो वाली बात कहाँ स्कूल के नल के पानी में जो मिठास थी वो अब ऑफिस के RO के पानी में वो टेस्ट नहीं मिलता।

क्लास में कागज़ का जहाज़ उड़ाया करते थे :- हम में से ज़्यादा तर बच्चे शायद ऐसा कारनामा किये किये होंगे और पकड़े जाने पर दूसरे का नाम लगाते थे उन दिनों स्कूल के ड्रेस में जो कॉन्फिडेंस था वो आज कितना भी महगा फॉर्मल पहन लो कोई मलतब नहीं, वो ब्लैक सूज़ में जो बात थी अब कितने भी ब्राँडेड जूते पहन लो पर वो मज़े नहीं।

बस के पीछे वाली सीट :- मज़ा तो तब आता था जब स्कूल/कॉलेज बस के पीछे वाली सीट पर गाना-गाना ज़ोर से हंस कर शोर मचाने वाली आवाज़ ना जाने कैसे चुप हो गयी अब काम,ऑफिस घर तक लाइफ सिमटती चली जा रही है सच में वो ज़िन्दगी- ज़िन्दगी थी कोई फ़िक्र नही था।

आज हमारी लाइफ कहाँ भागी जा रही है!

दोस्तों आप ये पोस्ट पढ़ रहे होंगे खुद सोचिये :- आप वो रहे ही नही जो पहले थे, खुद सोचो ! जब बर्थ-डे होता था तो सारे दोस्त इकट्ठे हो कर मस्ती के साथ सेलिब्रेट करते थे अब दोस्तों से मिले बिना फेसबुक व्हाट्सअप पे ही विश हो जाती है स्कूल हाल मेंशोर मचाते ही आवाज़ गूंज उठती थी पर अब ना जाने इतने शांत रहना कैसे सीख गए।

एग्जाम टाइम में आगे वाली सीट :- ओए "बता दे न यार" आपने भी ऐसा किया होगा लेकिन हमसे ज़्यादा नंबर उसे न मिल जाए इसके चक्कर में हम दूसरे को नहीं बताते थे बहुत सारी यादे और बातें हैं जितना भी कहो सब कम लगता है उन दिनों जिनसे से हम क्लॉस रूम में सीट के लिए लड़ते झगड़ते थे जिसे देखकर पसंद भी नहीं करते थे आज हम उन्हें इंटरनेट पर अक्सर खोजा करते हैं, "हम बड़े कब हो गए स्कूल के दिन न जाने कहाँ खो गए" ये सारी बातें अब एक सपने जैसी लगती हैं।

लाइफ में नो टेंशन वाले लम्हे,

लाइफ में नो टेशन वाला वक़्त बचपन व स्कूल का होता है घर में क्या हो रहा है खाना कैसे बनेगा, पैसे कौन कमा रहा है, कोई फर्क नहीं हमे तो बस पढाई, खेल कूद, दोस्त यार मस्ती और किसी से कोई मतलब नहीं दुंनिया में क्या हो रहा क्या नहीं ज़रा भी खबर नहीं अच्छा खाने, पहनने को मिले और क्या चाहिए।

संगीतकार :- जगजीत सिंह साहब ने एक ग़ज़ल के माध्यम से बचपना को बहुत ही खूबसूरती से साथ ग़ज़ल में तराशा है चंद लाइने मैं आप से शेयर कर रहा हूँ।

"ये दौलत भी ले लो, ये शोहरत भी ले लो , भले छीन लो मुझसे मेरी जवानी
मगर मुझको लौटा दो बचपन का सावन , वो कागज़ की कश्ती, वो बारिश का पानी"

बचपन का मोल कोई भी नही लगा सकता बस Enjoy किया जा सकता है महसूस किया जा सकता है क्योकि हम बचपन में कितनी भी गलतियां, शरारत करते हों सारी माफ़ होती थीं "इसलिए कहा गया है"

"जो जाके ना आए वह जवानी देखी , जो आके ना जाए वो बुढ़ापा देखा"

कुछ बच्चे जो बहुत गरीब परिवार से होते हैं, 

story about street kidsकुछ ऐसे परिवार के बच्चे भी अपने देश में हैं जो पढ़ना तो दूर ठीक से खाने तक को भी ठीक से नसीब नहीं होता ऐसे बच्चे गली, चौराहे और फुटपाथ पे हमे अक्सर दिख जाते हैं।

एक बार मैंने कुछ बच्चों से बाते की :- कुछ ऐसी इमोशनल बाते निकल कर सामने आई! जिसे आपके साथ शेयर कर रहा हूँ हमे लगता है कि वो नहीं सोचते पढ़ाई लिखाई क्या होती है किताबे क्या होती हैं, स्कूल क्या होता है सब से अनजान अपनी धुन रहते हैं "उन्हें देख कर बस यही लगता है" पर दोस्तों ऐसा बिल्कुल भी नही है।

नार्मल बच्चों जैसी हमारी भी लाइफ हो, वो सोचते हैं 

ऐसे बच्चे स्कूल तो जाना चाहते हैं:- पढ़ना तो वो चाहते हैं पर न तो उनका एडमीशन करने वाला होता है न यूनिफार्म न किताबें होती हैं पर इन सब ज़रूरतों को पूरा करेगा कौन ? न उनके पास घर है न माँ बाप कौन देखभाल करेगा, फुटपाथ के बच्चे जब स्कूल के बच्चों को देखते हैं उनकी लाइफ को महसूस करना चाहते हैं उनका घर, परिवार कैसा होगा कमरा कैसा होगा अच्छे अच्छे कपडे पहनते देख उनका भी मन करता है ये सारी बातें एक फुटपाथ पर सोने वाला बच्चा भी सोचता है

ऐसे बच्चों को दुःख तो तब होते हैं जब किसी होटल/रेस्टोरेंट में उनकी उम्र के बच्चे माँ बाप के साथ खाने, पीने मस्ती करने आते हैं और वो बच्चे उनके जूठे बर्तन धुलते हैं।

ऐसा नहीं की हम सब को उनको परवाह नहीं :- दोस्तों हम सोचते हैं उनको देख कर दुःख भी होता है पर हम अपनी ही लाइफ में ही उलझे हुए रहते हैं, इस वजह से उनकी चाह कर भी मदत नहीं कर पाते, मेरी ईश्वर से यही प्रार्थना है ऐसे बच्चों के लिए फ्यूचर में कुछ न कुछ हल ज़रूर निकले जिससे वह बच्चे भी शिक्षा पा सके जिनके आगे पीछे कोई नहीं।

9 comments:

  1. bita hua kal vapas nahi ata par uski yado ko sahej kar ham use har roj ji sakte h apki post bahut kuch baya kar rahi h bachpan k baare me. thanks sir

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    1. सही कहा दोस्त बीता हुआ कल वापस नहीं आता, पर ये कुछ ऐसी यादें हैं जिन्हे याद करके हम खुश हो लेते हैं

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  2. बहुत अच्छी तरह से लिखा और दिलचस्प ब्लॉग साझा करने के लिए धन्यवाद !!

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    1. ऐसे ही हौसला बढ़ाते रहे आपको बहुत बहुत धन्यवाद मित्र!

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  3. bohot achha laga padh ke

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  4. लम्हों की एक किताब है जिन्दगी, सांसो और ख्यालों का हिसाब है जिन्दगी, कुछ जरुरते पूरी, कुछ ख्वाहिशे अधूरी, बस इन्ही सवालो का जबाब है जिन्दगी । बेहतरीन लेख । धन्यवाद राहुल जी हम सब को अपनी यादों को याद दिवाने के लिए ।

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    1. बहुत खूब आपकी ये लइने तो इस पोस्ट में ऐड करनी थी..बहुत बहुत शुक्रिया बबिता जी

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  5. सच में बचपन की यादें भुलाए नही भूलती है। बढ़िया प्रस्तुति राहुल जी।

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  6. बहुत ही बढ़िया बचपन की यादो से भरा पोस्ट .....

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आपके कमेंट्स का हम हार्दिक स्वागत करते है। आपके सुझाव व मार्गदर्शन से हमारा हौसला और बढ़ेगा जिससे हम और बेहतर क़र सकेंगे !!धन्यवाद!!

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